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    कार्यशालाएँ एवं प्रशिक्षण

    सीपीडी प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएँ

    सतत व्यावसायिक विकास (CPD) – अनिवार्य 50 घंटे

    केंद्रीय विद्यालय कामाख्यानगर में शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास एवं क्षमता निर्माण को विशेष महत्व दिया जाता है। सतत व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development – CPD) शिक्षकों को अपने ज्ञान, कौशल, शिक्षण-पद्धतियों तथा नवीन शैक्षिक आवश्यकताओं को निरंतर विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।

    निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक शिक्षक द्वारा प्रति वर्ष 50 घंटे का सतत व्यावसायिक विकास (CPD) पूरा किया जाना अनिवार्य है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, वेबिनार, अभिमुखीकरण कार्यक्रमों, विषय-विशेष प्रशिक्षण तथा अन्य स्वीकृत व्यावसायिक विकास गतिविधियों में सहभागिता शामिल है।

    केंद्रीय विद्यालय कामाख्यानगर के शिक्षक केन्द्रीय विद्यालय संगठन (KVS), क्षेत्रीय कार्यालय, CBSE, NCERT, NISHTHA तथा अन्य मान्यता प्राप्त संस्थाओं द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण एवं क्षमता-वर्धन कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। विद्यालय स्तर पर भी स्टाफ बैठकों, सहकर्मी-अधिगम, उत्कृष्ट कार्य-पद्धतियों के आदान-प्रदान, सहयोगात्मक पाठ-योजना, ICT आधारित शिक्षण तथा नवीन शिक्षण विधियों पर चर्चा के माध्यम से व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित किया जाता है।

    सीपीडी के प्रमुख क्षेत्र

    • दक्षता-आधारित एवं अनुभवात्मक अधिगम
    • बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN)
    • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020
    • ICT एवं डिजिटल शिक्षण
    • दक्षता-आधारित मूल्यांकन
    • समावेशी शिक्षा एवं विशेष आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षण
    • बाल सुरक्षा, POCSO एवं विद्यार्थी कल्याण
    • कला-एकीकृत एवं खेल-एकीकृत शिक्षण
    • नवीन शिक्षण-पद्धतियाँ एवं कक्षा प्रबंधन
    • विषय-विशेष प्रशिक्षण एवं क्षमता-वर्धन

    विद्यालय द्वारा शिक्षकों की सीपीडी गतिविधियों एवं प्रशिक्षण में सहभागिता का उचित अभिलेख रखा जाता है। प्रत्येक शिक्षक को निर्धारित 50 घंटे के वार्षिक सीपीडी को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इन प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं के माध्यम से शिक्षकों को नवीन ज्ञान एवं कौशल प्राप्त होते हैं, जिससे विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है।

    “शिक्षकों का निरंतर सीखना ही विद्यार्थियों के निरंतर विकास का आधार है।”